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बहुजन स्वराज पंचायत, हृदयपुर, वाराणसी

शब्दांकन [Hindi Transcript]

[2 नवम्बर 2025]


शब्दांकन [TRANSCRIPT]

विडियो लिंक: https://youtu.be/Ig64rJJVraE

2 नवम्बर 2025


राजेन्द्र मानव:

अगर यह बाज गांव के किसानों को उजाड़ दिया जाएगा जमीन उनकी जो है अजगर कर ली जाएगीतो ये कहां जाएंगे?

रामजनम:

काशी द्वार परियोजना स्पोर्ट सिटी वरुणा बिहार एक वरुणा बिहार दो नाना प्रकार की परियोजनाएं हैं और मैं पूछना चाहता हूं कि आप जमीन लेके क्या करेंगे कि …

अशोक प्रजापति:

यह वर्तमान की जो डबल इंजन की सरकार है किस तरह से केवल उत्तर प्रदेश के ही किसानों के साथ नहीं पूरे देश के किसानों के साथ छलने का कार्य कर रही है।

रामजी यादव:

उन तमाम सारी ज्यादतियों के खिलाफ जो किसान लड़ रहे हैं वो केवल मुआवजे की लड़ाई नहीं है। वो बहुत कुछ बदल जाने के खिलाफ अपनी जिंदगी और जमीन की लड़ाई को लेकर आगे चल रहे हैं।

लक्ष्मण प्रसाद:

जहांजहां के किसानों ने लड़ाई लड़ा उन सारे किसानों को हक अधिकार मिला।

फ़ज़लुर्रहमान अंसारी:

बहुजन समाज पे ही हमला क्यों होता है? यह हम बहुजनों को सोचना होगा।

रामदुलार:

वास्तव में इस दुनिया का दुनिया की पूरी नींव में अगर देखा जाए तो यह बहुजन समाज ही है। [संगीत]

सामू भगत [सत्संग]:

लोक विद्या के स्वामी बोल लोक विद्या के स्वामी बोल

ज्ञान के अपने दावे खोल ज्ञान के अपने दावे खोल

लोक विद्या के स्वामी बोल ज्ञान के अपने दावे खोल

तेरा ज्ञान है अनमोल तेरा ज्ञान है अनमोल

[संगीत] लोकविद्या के स्वामी बोल ज्ञान के अपने दावे खोल

लोकविद्या … ज्ञान जो विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ाई जाती किसान का बेटा अपने पिता के द्वारा अपने भाई के द्वारा वह देखते देखते ज्ञान प्राप्त कर लेता है। किसानी करता है वो लोक ज्ञान है। इसी को लोकविद्या ज्ञान कहते हैं।

तेरा ज्ञान है अनमोल तेरा ज्ञान है अनमोल है अनमोल भाई है अनमोल।

मुर्ख-गँवार न खुदको तोल

तेरी विद्या है बेजोड़ लोकविद्या है अनमोल

अपने ज्ञान का दावा ठोक

तू ज्ञान के अपना दावा ठोक

लोक विद्या के स्वामी बोल ज्ञान के अपने दावे खोल

राजेन्द्र मानव:

आज लोक विद्या जन आंदोलन के माध्यम से सात आठ और नौ अक्टूबर को विद्या आश्रम सारनाथ में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। बहुजन स्वराज पंचायत उसे पूरे देश से हर एक प्रांत से जो है लोग आए हुए थे। उन्होंने अपनी विचार रखे उस पर चर्चाएं हुई और उसी समय तय किया गया था कि इस कार्यक्रम को बहुजन स्वराज पंचायत कार्यक्रम को हम गांव में ले चलेंगे। और गांव में हम चर्चा करेंगे कि बहुजन कौन है? स्वराज क्यों चाहिए और पंचायत की व्यवस्था क्या है? इन सभी बिंदुओं पर आज हमारे बीच लोग विद्या जन आंदोलन के साथी यहां पर आए हुए हैं। साथ ही भारतीय किसान यूनियन के भी साथी आप देख रहे हैं टोपी लगाए हुए हैं। आप सब लोग आपसे रूबरू होंगे। बहुत से इधर जो आंदोलन चले सतवा एसटीपी आंदोलन चले हम लोगों का जो रिंग रोड का आंदोलन चला उसमें भी आप लोग हम लोगों के साथ थे और उत्तर प्रदेश में जहां जहां भी किसानों के खिलाफ सरकार या प्रशासन कोई कार्य करता है तो भारतीय किसान यूनियन उसके खिलाफ जनता के साथ किसानों के साथ उसकी लड़ाई लड़ती है। तो बहुजन स्वराज पंचायत के साथ ही साथ वैदिक सिटी बीडीए जो योजना लाई है यह प्रदेश सरकार की योजना नहीं है। आप समझ लीजिए इसको। उत्तर प्रदेश का यह प्रोजेक्ट नहीं है। वाराणसी विकास प्राधिकरण का ये बीडीए का प्रोग्राम है। वैदिक सिटी और बीडीए क्या करती है इसको भी आप जान लीजिए। बीडीए जो है सबसे बड़ा कॉलोनाइजर है। जमीन का सबसे बड़ा कॉलोनाइजर बीडीए होता है। हर जिले का वो किसानों की जमीन को ओनेपने में सस्ते दामों में लेते हैं और विकास के नाम पर आवास के नाम पर अच्छे-अच्छे हम मकान आपको देंगे जो है आवास की व्यवस्था करेंगे उद्योग लगाएंगे पूंजीपतियों को जो है ये जमीन विकास के नाम पर जो है बीडीए बेचता है तो वैदिक सिटी भी जो है ये बीडीए की योजना है और ये पांच गांव गांव के जो किसान हैं हृदयपुर, सिंहपुर, हसनपुर, सतवा, पतवा इनकी जीविका जो इस किसानी पेशे से जुड़ी हुई है। अगर ये पांच गांव के किसानों को उजाड़ दिया जाएगा, जमीन उनकी जो है अजगर कर ली जाएगी तो ये कहां जाएंगे? इनकी जमीन को बचाने के लिए जो है हम लोगों को जो है वैदिक स्थिति योजना रद्द हो इसके लिए भी हमें कार्यक्रम को आगे बढ़ाकर कार्यक्रम को आंदोलन का रूप देना है। साथ ही साथ रिंग रोड जो 13 महीने आप लोगों ने आंदोलन चलाया किसानों ने मिलकर आज रिंग रोड का अनुकंपा राशि तो मिला लेकिन जो चार गुना करके धनराशि मिलनी चाहिए उस समय के जमीन का जो सर्किट रेट था उसके अनुसार मुआजमा किसानों को नहीं मिला के अनुकंपा राशि मिली थी और आप लोगों ने उनको राशि दी। उसके बाद सरकार और प्रशासन के साथ बैठकर माननीय सांसद महेंद्र पांडे और डीएम और किसानों के बीच बैठक हुआ था और उसमें समझौता हुआ कि आज के सर्किट के रेट के हिसाब से किसानों को मुआजवा दिया जाए और जो मुआजवा बना था 337 करोड़ वो लिखित है। वो हम लोगों के पास लिखित है और उस वादे को 337 करोड़ जो बकाया आज तक नहीं मिला किसानों को उस धनराशि को लेने के लिए भी हमें इस कार्यक्रम में जोड़कर जो है वैदिक सिटी के साथ 337 करोड़ का भी बकाया किसानों को मिलना चाहिए। यह हमारी लड़ाई के साथ जुड़ी हुई है। इन सभी समस्याओं को लेकर जो है आज हम लोग बैठे हैं। हमारे बीच स्वराज अभियान आंदोलन से जुड़े [संगीत] राम जन्म भाई संघर्षों के साथी आपके बीच बहुजन स्वराज पंचायत के विषय में विस्तृत आपको चर्चा करेंगे और आपको बताएंगे कि बहुजन कौन है।

रामजनम:

जैसा कि मानव जी ने कहा कि जो वैदिक सिटी से पीड़ित लोग हैं उनकी पंचायत है। दूसरी तरफ बहुजन स्वराज पंचायत है। तो मैं पहले जो लोग पीड़ित है यहां उसी की बात करूंगा। केवल बनारस में वैदिक सिटी के लोग नहीं पीड़ित है बल्कि तमाम परियोजनाओं के नाम पे बनारस में कम से कम 810 ऐसी परियोजनाएं हैं जिनके नाम पे शासन सत्ता जरी किसानों की जमीन ले रही है। जबरी जबरदस्ती इस देश में एक कानून है भूमि अध किसान कह रहा है उस इलाके के लोग कह रहे हैं कि भाई आपको जमीन लेना है विकास के लिए किसी को भी जमीन लेना है किसी भी शासन को सत्ता को किसी को भी जमीन लेना है तो इस देश में कानून का राज है कानून के मारफत आइए आप जिस तरह का सर्वे में होता है उस भूमि ग्रहण कानून के अंतर्गत उसको करके आइए और बनता है तो आप जमीन लीजिए। ये किसान कह रहा है देश ये जो इलाके के लोग कह रहे हैं लेकिन सरकार जैसा कहा मानव जी ने कि ओनेपौने दाम पे जमीनें लेना चाहती है। ओनेपौने दाम पे साथियों केवल ये वैदिक सिटी का सवाल नहीं है। काशी द्वार परियोजना, स्पोर्ट सिटी, वरुणा बिहार एक, वरुणा बिहार दो नाना प्रकार की परियोजनाएं हैं। और मैं पूछना चाहता हूं कि आप जमीन लेके क्या करेंगे? जमीन लेके कंपनियों को देंगे, कॉरपोरेट को देंगे और इलाके को विकसित करेंगे और पैसा कमाएंगे, माल लूटेंगे और हम लोगों को हमारी पुश्तैनी जगह से बेदखल कर रहे हैं। इस तरह की शासन सत्ता की व्यवस्था है। ये शासन सत्ता की इस तरह की व्यवस्था है। ऐसी व्यवस्था में हम लोग असहाय हो जाते हैं। मैं देख रहा हूं सबसे तीखा आंदोलन यहां कई लोग बैठे हैं। ये अशोक प्रजापति हैं, मानव जी हैं, लक्ष्मण भाई हैं, राम दुलार जी खुद हैं। तमाम लोग हैं जो तमाम जगहों पर जाते हैं और किसान की लड़ाई में उनके साथ खड़े होते हैं। जेल जाना होता है तो जेल जाते हैं। तमाम चीजें करते हैं। लेकिन इतने के बावजूद भी ये सत्ता टस से नंब नहीं हो रही है और इसी परियोजनाओं में तमाम नाना प्रकार की चीजें कर रही है। मतलब अब सत उत्तर प्रदेश सरकार नहीं लेगी। विकास प्राधिकरण लेगा। पहले हो रहा था कि बाजार के रेट से लेंगे। अभी हो रहा है कि हम उसको विकसित करेंगे और कुछ हिस्सा आपको भी देंगे। तमाम तरह के तीन तिकडम की कोशिश हो रही है। ये तीन तड़म की कोशिश हो रही है। और हम हम लोगों को इससे मुक्ति कैसे मिलेगी? असल सवाल ये मुक्ति कैसे मिलेगी? अभी सारनाथ में एक बहुजन स्वराज पंचायत हुई जिसमें कहा गया कि दुनिया के स्तर पे समाज दो कैटेगरी में दिखाई देता है। एक विशिष्ट समाज है जिसको हम लोग प्रोफेशनल क्लास कहते हैं। दूसरा दुनिया का बहुजन समाज है जिसको भगवान बुद्ध ने सामान्य जन कहा था। इसी बहुजन समाज को सामान्य जन कहा था। और सामान्य जन के तमाम चीजें लूटी जा रही हैं और सामान्य जन तमसगीर है। यह बता हुआ है कि

अशोक प्रजापति:

यह वर्तमान की जो डबल इंजन की सरकार है किस तरह से केवल उत्तर प्रदेश के ही किसानों के साथ नहीं पूरे देश के किसानों के साथ छलने का कार्य कर रही है। यह केवल बनारस के किसान नहीं कितनी जितनी योजनाओं से परेशान है। चाहे यहां पे वैदिक सिटी योजना हो। इस योजना में पांच गांव के किसान प्रभावित हो रहे हैं। जिसमें सवा भी है, पतेरवा भी है, हृदयपुर भी हसनपुर है, औरपुर के किसान है। इन पांच गांव के किसानों की जमीनों का अधिग्रह हो रहा है और किसानों की संख्या आज आप देख लीजिए क्या है। ये बड़े शर्म की बात है। जो किसान भाई अपने घर में बैठे हुए हैं। मैं उन्हें खुला कह रहा हूं कि इस तरह से आप लड़ाई लड़ेंगे तो आप लड़ाई नहीं जीत पाएंगे। यह धुर्तबाज़ी सरकार से जीत नहीं पाएंगे। इसलिए आपको गोलबंद होना होगा। एसटीपी प्लांट की बात होती है कि सतमा के किसानों ने लड़कर यह इतिहास रचा है। तो उस समय उनके साथ जनसमर्थन था। आज वैदिक सिटी की बात हो रही है और हमारी क्या स्थिति इसे आपको देखना होगा। अभी रिंग रोड की लड़ाई हम लोगों ने लड़ा। उसमें हमें कुछ मुआवजा मिला अनुकंपा धनराशि के रूप में। पर भूमि अधिग्रण कानून 2013 के अनुसार जो हमें पैसा मिलना चाहिए वह पैसा यह वर्तमान सरकार नहीं दे रही है। हमारे जमीन का पैसा 337 करोड़ आज भी वह अपने पास रखा हुआ है। यहां के लोग वादा करने वाले उस समय के मिनिस्टर रहे। उस समय के सांसद रहे। उन्होंने वादा किया कि मुझे देख लो, मेरी सरकार को देख लो, एक बार मौका दो। कई बार लोगों ने मौका दिया पर बार-बार उनके साथ धोखा किया गया। तो यह हमें और आपको जागने की जरूरत है। मैं आपको बता दूं कि यह वैदिक सिटी की बात नहीं हो रही है। काशी द्वार योजना की भी बात हो रही है। जहां 10 गांव प्रभावित हो रहे हैं। वहां की भी यही स्थिति है। उससे बड़ी बात जिस गांव से मैं बिलोंग करता हूं। ग्राम इदलपुर प्रताप पट्टी ग्रामभा जो हरवा में पड़ता है वहां पर वर्ल्ड एक्सपो सिटी के नाम से 10 गांव की जमीन का अधग्र हो रहा है और मैं आपको दावा के साथ कह रहा हूं कि वहां पे जमीनों की अधिग्रण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यहां की आपत्ति तो सुनवाई नहीं होगी। दो साल हो चुका हमारे यहां की आपत्ति की सुनवाई हो गई। एक बार मैंने लड़ाई लड़ा बहुत तेजी से। यही बात है कि लोग बहुजनों का नेतृत्व स्वीकार नहीं कर पाते हैं। हम नेतृत्व करने गए अपने क्षेत्रों में। बहुजन तो हमारे साथ थे। जो उस विचारधारा के लोग रहने वाले वो हमारे साथ नहीं आए। कहिए क्या नेतृत्व करेगा? क्या बताएगा? मैंने कहा कि भाई जो कानून की बात है मैं बताने का काम कर रहा हूं। उसे आप समझिए। नहीं गोलबंद हुए और सरकार क्या की है? धारा 321 के तहत सरकारी गजट कर दिया। आपके साथ कहां धोखा होता है? मैं आपको ये बता दूं। ये आपका जो सर्किट रेट की किताब हमारे पास में है जो बनारस में छ सालों से बढ़ा नहीं है। 2019 के बाद बनारस का जिलाधिकारी बनारस का सर्कि रेट नहीं बढ़ाया। क्योंकि कारण यह है कि अधिग्रह की प्रक्रिया में जमीन लेनी है और ओनेपौने दाम पे लेनी है। यदि रेट बढ़ जाएगा तो इन्हें मुआवजा किसानों को ज्यादा देना पड़ेगा। अब बताइए हम आपको बता दे रहे हैं। यह सिंहपुर का है। ₹6000 है। सड़की रेट है। मैं आपको बता रहा हूं। इसी प्रकार से आप देख लीजिए। सातवां का 3500, हसनपुर का 3500, हृदयपुर का 3500 और पतेवा का 3500। ठीक है? यह वर्ग मीटर में है। यह आपका स्क्वायर मीटर में है। यह सर्किट रेट लगी है। इस सर्किट रेट से आपका यदि 3500 का आप लेते हैं। आप जो वर्तमान में गांव लोग में कहते हैं कि ₹3.5 लाख आओ सर की रेट। ठीक है? 3500 का मतलब ₹.5 लाख। अब उसका टोटल चार गुना करेंगे तो 14 लाख बिस्सा आएगा। मैं आप सभी लोग से पूछना चाहता हूं इस सवामा और हृदयपुर, पतेरवा और सिंहपुर, हसनपुर के किसानों से क्या 14 लाख बिस्सा आपकी वर्तमान में जमीन है यहां पे? सरकार वर्तमान में देगी तो 14 लाख, सिंहपुर को देगी तो 24 लाख बिस्सा देगी। यह स्थिति है। अर्थात मिला के पूरा ₹25 लाख इससे से ऊपर आपको जमीन देने वाली नहीं है। और इन जहां 3500 मैंने बताया वहां की किसानों की भी 14 से ₹15 लाख से ऊपर देने वाली सरकार नहीं है। और यह आप लोग समझिए आपकी गोलबंदी नहीं होने से आपकी एकजुटता नहीं होने से यह किसान की कमजोरी का यह फायदा सरकार उठा रही है।

रामजी यादव:

बहुजन स्वराज पंचायत उन तमाम सारी जगहों पर जो आंदोलन चल रहे हैं अपने जमीन को बचाने के लिए और खासतौर से सरकार की उन तमाम सारी ज्यादतियों के खिलाफ जो किसान लड़ रहे हैं वो केवल मुआवजे की लड़ाई नहीं है। वो बहुत कुछ बदल जाने के खिलाफ अपनी जिंदगी और जमीन की लड़ाई को लेकर आगे चल रहे हैं। सरकार किस तरह से काम करती है इसका एक उदाहरण मैं इस रूप में देना चाहूंगा कि यहां से सवा किलोमीटर दूर आजमगढ़ जिले में मंदूरी नाम का एक हवाई अड्डा है छोटा सा जिस पर कभी भी शायद जहाज नहीं उतरता होगा। एक आध साल में अगर एक आध हेलीकॉप्टर उतर जाता होगा किसी नेता का तो उतर जाता होगा। लेकिन सरकार देखिए क्या अलबेली चाल होती है उसकी। किस तरीके से वो किसानों को प्रताड़ित करती है। कैसे उनके पूरे निवास को खेत को तमाम सारी चीजों को हड़प लेना चाहती है। इसका एक उदाहरण है वो जगह। एक नोटिफिकेशन जारी होता है और ड्रोन से सर्वे गांव में आठ गांव में शुरू होता है जो उस हवाई अड्डे के आसपास के आठ गांव हैं जो बनारस टांडा रोड के बाई तरफ इधर से जाते हुए है उन आठ गांवों में सर्वे हुआ और पता लगा सारी जमीनें हवाई अड्डे के विस्तार के लिए ली जाएंगी रात में जब सर्वे हुआ तो गांव के लोगों को यह आशंका हुई कि पता नहीं ये कौन से लोग हैं, किस लिए यह कर रहे हैं। तो उन्होंने विरोध जब जताया तो पुलिस भी साथ में गई थी। लेखपाल साथ में गए थे और पुलिस के लोगों ने लोगों पर लाठी चार्ज करना शुरू किया। कम से कम एक दर्जन महिलाएं तो उसी रात में घायल हुई। बूढ़े लोगों को भी चोट आई। बच्चे लोग जितने लोग उस जद में आ सकते थे सबको चोट लगी। किसानों ने समझ लिया कि सरकार की नियत ठीक नहीं है और रात में इस तरीके से ड्रोन से सर्वेक्षण करना यह किसी भी तरीके का कानून सम्मत काम नहीं है। लोगों ने खरियाबाग में आंदोलन शुरू किया और मेरा ख्याल है यहां मौजूद कई लोग उस आंदोलन से बहुत गहराई से जुड़े हुए थे। राम जन्म जी कम से कम 10 बार गए होंगे वहां। हम लोग रिपोर्टिंग लगातार कर रहे थे और लगभग एक साल तक वह आंदोलन चला। उन आठ गांव के लोगों का जीना मुहाल था। कई कारणों से खासतौर से पुलिसिया उत्पीड़न और धमकी के साथसाथ जो लाल म आजमगढ़ के विधायक थे निरहुआ जी उन्होंने तो तथाकथित बुलडोजर बाबा की जो भाषा है उससे भी कुछ चार कदम आगे बढ़कर बात कहना शुरू किया लेकिन अंतत हुआ क्या जिला स्तर पर ये पूरी घटना इतनी ज्यादा फैल गई कि लगा कि अब जो है यह गांव नहीं रहेंगे और लोगों को यहां से उजाड़ दिया जाएगा। लेकिन जब यह चुनाव हुआ है 2024 का तो उसके बाद वो क्षेत्र लालगंज लोकसभा में आता है और लालगंज लोकसभा के सांसद ने दरोगा प्रसाद सरोज ने संसद में यह सवाल पूछा कि मंदूरी हवाई अड्डे को लेकर केंद्र सरकार की क्या योजना है? तो नागरिक उयन मंत्रालय ने यह जवाब दिया कि वहां के हवाई अड्डे के विस्तार की हमारी कोई योजना नहीं है और इस तरीके का कोई भविष्य में भी ऐसी कोई योजना नहीं है क्योंकि वहां के हवाई अड्डे का कोई इस्तेमाल किसी भी रूप में केंद्र सरकार या राज्य सरकार करने में अक्षम है और वह वैसे बना दिया गया स्थानीय स्तर पर लेकिन वो नहीं है तो आप समझ लीजिए कि पूरी सरकार जो उसके लोग जिला स्तर पर जिस तरीके से लोगों का उत्पीड़न कर रहे थे वो क्या था कहां से शुरू हुआ था कौन लोग उसके पीछे थे ये एक बड़ी विडंबना के तौर पर हम देख सकते हैं इसको बनारस में रिंग रोड को आप देख रहे हैं तीन चरणों में रिंग रोड बन गया है और रिंग रोड के किनारे पर जितने भी गांव हैं किसी ना किसी रूप में उन गांव में विपदा आई हुई है। रिंग रोड के किनारे तोफापुर, मिलकोपुर, कोरची और सरैया नाम के चार गांव उधर हैं। जालूपुर परगने में 108 एकड़ जमीन को सरकार ने राजस्व विभाग ने बंजर घोषित कर दिया। फसल खड़ी है और उनको बंजर घोषित कर दिया कि यहां जो है बंजर है और तहलका मच गया। जब हम लोग इस बात की रिपोर्टिंग के लिए गए वहां तो पता लगा कि गांव के लोगों को नहीं पता है कि बंजर कौन सा घोषित किया गया। लेकिन उसी बीच में हमने खतौनी निकालना शुरू किया तो खतौनी पर आमतौर पर लोगों के नाम होते बहुत सारी खतौनियां ब्लैंक थी। नंबर की खतौ ब्लैंक हो गई और फिर इसकी रिपोर्टिंग हम जब हम लोगों ने किया और इसकी तह में गए कि यह क्या है तो पता लगा कि 60 साल पहले जो आदमी मर गया है छेदी सिंह नाम का उसके नाम से नोटिस भेजा गया है कि आप हाजिर होइए नहीं तो आपकी जमीनें बंजर घोषित कर दी जाएंगी। इस तरह की विडंबना आप देखिए। ये उन चार गांवों की बाद में उन लोगों ने परिश्रम किया, लड़ाई की और तमाम सारे आंदोलन छोटे-छोटे जो हुए उसके बाद राजस्व परिषद ने स्टे दे दिया। अभी स्टे है लेकिन उसका क्या होगा? इसका कोई आकलन नहीं हम कर सकते।

रामहिन्द:

पहले सातवा एसटीपी प्लांट लगाने का कार्य शुरू किया गया। उसके बाद फिर रिंग रोड बनाने का कार्य शुरू किया गया। अब इसके बाद वैदिक सिटी बनाने का कार्य होने जा रहा है। अब सतवा और रिंग रोड में तो हम लोग प्रदरना प्रदर्शन बहुत अच्छा किए। ट्रीटमेंट प्लांट हट गया। रिंग रोड में भी हम लोगों को सब कुछ सफलता हासिल हुआ है और अभी बाकी है। मैं चाहता हूं कि आप लोग इसे एसटीपी और रिंग रोड के तरह जनसभा करें और जनता किसान इकट्ठा होवे और हम लोग इकट्ठा होकर प्रशासन को दिखाएं कि हम अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है। यहां वैदिक सिटी नहीं बनने देंगे।

पन्नालाल यादव:

वैदिक सिटी में विरोध हमारा चल रहा है और अभी वह जो आए थे ड्रोन कैमरा का लोगों ने हम लोगों को खबर किया हम लोगों ने रोका थाने की पुलिस को भी उन लोगों ने बुला लिया बहस हुई से हमारी हम कहा हमारी जमीन है ये हमारी जमीन पर बिना हमारे अनुमति के कोई डोन कैमरा नहीं चला सकते पहले ये स्वामित्व हमसे ले ले अपना स्वामित्व बना लें उसके बाद ही जो कुछ करना चाहेंगे करेंगे हम हम लोग इनके सारे किसान मैक्सिमम किसान विरोध किए आपत्ति दर्ज किए हमारी आपत्तियों का निस्तारण नहीं किया गया उसके पहले ये कुछ नहीं कर सकते उन्होंने रोका उनके अधिकारियों से फोन से बात किया उन्होंने हमसे बात किया हमने कहा बताइए आपको मना किया गया था आपने ये फिर से कैमरा क्यों भेजा या हम लोगों को बुला लेते किसानों को बुला लेते आप बैठते पंचायत कर लेते जो कुछ करना है करते बहरहाल उन्होंने रोका है अपना लोगों को वापस बुला लिया। हमने कहा तब तक कुछ नहीं करेंगे जब तक कि किसानों से कोई बात नहीं करेंगे। या हम लोग के आपत्ति खारिज करिए हमारी जमीन ले लीजिए। आप खुद कैमरा चलाइए उसके पहले नहीं मान गए वो लोग चले गए। वो रोका गया। दूसरा है रिंग रोड में जो फर्स्ट फेज है उसमें सर्विस रोड नहीं बनी है और इसका डीपीआर 29 करोड़ का पास हो चुका है। रिंग रोड के जैसे हृदयपुर में पुलिया के बगल में भी रोड डालेंगे नीचे से वो एक तरह यहां के लिए तो बहुत अच्छा होगा। लेकिन अन्य जगह 60 मीटर सिर्फ रोड ये लिए हैं। 60 मीटर के बाद अगर जिस किसान की जमीन जाएगी लोग जागरूक अगर हम लोग नहीं रहे तो दिक्कत होगी कि उसमें वो बढ़ा के बना लेंगे और पैसा नहीं देंगे। अभी भी बहुत लोगों का पैसा रुका हुआ है। 337 करोड़ का मामला सब लोग जानते हैं। हम लोग लड़ रहे हैं। या उनको अगर हम नए सिरे से संगठित नहीं हुए तो फिर वो हमारा 337 करोड़ तो रुका ही रुका है। नई जमीन भी वो करेंगे। ये डीपीआर पास हो चुका है। वो बनाने जा रहा है क्योंकि फेज दो और तीन में इन्होंने पहले से ही वोट डाला है।

कमलेश:

सर्विस रोड बगल से वैदिक सिटी सरकार बनाने की मंशा रखी है। अपने पांच गांव जबकि कुछ दिन पहले अभी हमारा एक धरना चला करीब छ दिन तक लगातार और डोमरी गांव डोमरी गांव में सरकार अपनी पूरा 10 ट्रैक्टर करीब 10 लगा के काम चला रही थी। टेंट भी लगाया था कई जगह अपना और वहां धरना दिया गया और काम शुरू लेकिन वहां के किसान एक्टिव हुए। हमारे चार जिले के किसान यूनियन के लोग आए। वहां उनको अपना ट्रैक्टर भी भगाना पड़ा, जेसीबी भी ले भागना पड़ा। अपना टेंट भी उखाड़ लिए। तो वहां एक शक्ति हम लोगों ने दिखाया। उसने पछाड़ा भी काम वहां बंद करा दिए। एक धरना और चल रहा है अपना रामनगर बंदरगाह बनाने का। वहां भी लगातार धरना चल रहा है। वहां भी अब तक सरकार कायम हो जाती है अपने काम पे। लेकिन वहां भी उसको खदेड़ा गया। वहां का भी काम बंद हुआ। तो उसी तरह अपने वैदिक सिटी का भी काम बंद होगा। लेकिन हम लोगों को एकजुट होना पड़ेगा और अगली बार जब मीटिंग होगी तो उसमें कम से कम एक हफ्ता पहले से तय किया जाएगा। डोर टू डोर सबके दरवाजे पर चला जाएगा। सबसे कहा जाएगा कम से कम एक गांव से 25 किसान निकले तो कम से कम सवा5 किसान होंगे। तो अगली बार इससे बड़ी मीटिंग रखा जाए। हम लोग लड़ेंगे तो निश्चित जीत होगी। घर में बैठेंगे तो कुछ नहीं हो पाएगा।

लक्ष्मण प्रसाद:

एक तो यह कि जहांजहां के किसानों ने लड़ाई लड़ा उन सारे किसानों को हक अधिकार मिला। उनकी बात सुनी गई। उनका आंदोलन सफल हुआ और आप भी इस चीज को देख रहे हैं। रिंग रोड की लड़ाई अगर लड़ी गई तो इसमें सफलता मिली। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की लड़ाई यहां पर लड़ी गई तो इसे सफलता मिली। [संगीत] सारनाथ में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का की लड़ाई हुई। उसमें भी सफलताएं मिली और इसके बाद बनारस में और जहांजहां भी लड़ाईयां हुई भूमि अधिग्रह के सवाल को लेकर के और भी तमाम सवालों को लेकर के तो वहां सफलताएं मिली। तो यह जो है यहां पर जो ये जिस योजना की बात हो रही है कि सरकार वैदिक सिटी यहां पर बना रही है। वैदिक सिटी का कार्यक्रम यह भी कहा जा रहा है कि यह रद्द हो रहा है। रद्द हो गया है। विधायक स्वयं यह महसूस कर रहे हैं और यहां के लोग मांग ये कर रहे हैं कि जब रद्द हो गया है तो फिर खतौनी पर नाम आना चाहिए। यह तमाम जो बातें हैं तो यह अभी बहुत साफ नहीं है कि वास्तव में क्या साल दो साल तीन साल के चुनाव का वक्त आता है तो ये थोड़ा सा ठंडा पड़ जाते हैं। पिछले साल लोकसभा का चुनाव था और आगे आने वाले एक दो साल के अंदर विधानसभा का भी चुनाव होने वाला है तो हो सकता है कि ये थोड़ा सा कुछ दिनों तक शांत बैठे रहे और उसके बाद फिर यह शुरू हो जाए। तो इस बात को देखते हुए अगर हम लोग भी शांत बैठे रह गए, हम लोग भी मान लिए कि कुछ आगे नहीं होगा तो अचानक एक दिन ऐसा आएगा कि हमें समय नहीं मिल पाएगा और ये धावा बोल करके इस वैदिक सिटी योजना को क्रियान्वित करने में लग जाएंगे। तो मित्रों इस आंदोलन की गति को इस आंदोलन की धार को आप बनाए रखिए। आंदोलन की जब धार ये तेज रहेगा तो उन्हें भी लगेगा कि नहीं लोग जाग रहे हैं। सजग हैं। वहां जाना कठिन है। इस योजना को पूरा कर पाना कठिन है। लोग गोलबंद हैं। यह चीजें आप प्रदर्शित कीजिए। और भारतीय किसान यूनियन जैसे हर जगह साथ में रहा। आपके इस आंदोलन में भी साथ में रहेगा। जैसा चाहेंगे वैसा होगा। नेतृत्व की क्षमता बात होगी। वह भी उसमें भी आगे रहने का वो भी उसमें भी आगे रहेगा या जैसे भी आपकी लड़ाई होगी जैसा आप चाहेंगे उस तरह से सहयोग किया जाएगा।

फ़ज़लुर्रहमान अंसारी:

बहुजन समाज पे ही हमला क्यों होता है? यह हम बहुजनों को सोचना होगा। बात गांव की नहीं है। बात शहर की नहीं है। बात प्रदेश की नहीं है। बात देश की है। बहुजन समाज के लोग जिन भी पेशों में लगे हुए हैं। चाहे वो खेती हो, चाहे वो किसानी हो, चाहे वो कारगरी हो, चाहे वो खेला पटकरी का कार्य हो, छोटी पूंजी का व्यवसाय हो, सब पे हमला है। ये हम बहुजन समाज को सोचना होगा। यह हमला क्यों है? क्योंकि एक ऐसी मानसिकता के लोग आजादी से अब तक इस देश में हुकूमत करते आए हैं जिनको बहुजन समाज के लोग पसंद नहीं है। बहुजन समाज की तरक्की पसंद नहीं है। बहुजन समाज की विरासत पसंद नहीं है। हम बहुजन समाज के लोग बहुजन समाज के संत गुरु महापुरुषों के विचार पर चलने वाले लोग हैं। हम भारत को बनाने वाले लोग हैं। भारत आज से नहीं है। मुगलों के पहले भी भारत रहा है। मुगलों के बाद भी भारत रहा है। अंग्रेजों के बाद भी भारत रहा है। आज भी भारत है। और भारत को बनाने में भारत को सजाने में हम बहुजनों का ही पूरा सहयोग रहा है। पूरा सपोर्ट रहा है। लेकिन आज सोचने की बात है। चाहे वह बहुजन समाज का किसान हो, चाहे वह बहुजन समाज का कारीगर हो, चाहे बहुजन समाज का गांव का रहने वाला व्यक्ति हो या बहुजन समाज के शहर का रहने वाला व्यक्ति हो, उनके व्यवसाय पे हमला क्यों किया जाता है? यह सोचने वाली बात है। साथियों बहुजन समाज के लोगों में एकता नहीं है। बहुजन समाज लोग के लोग खंड खंड में बटे हुए हैं। बहुजन समाज के लोग विचारों में बटे हुए हैं। हमें आपस में एकता के सूत्र को खोजना होगा। एक होना होगा। आज शहरों में विकास के नाम पर बहुजन समाज के लोगों की दुकानों को, बहुजन समाज के लोगों के मकानों को गिराया जा रहा है। ये सिर्फ शहरों में नहीं चल रहा है। आज हम गांव में भी आकर देख रहे हैं वैदिक स्थिति के नाम पर। तो रामनगर में बंदरगाह के नाम पे तो अभी डोंगरी गांव में चल रहा था। इधर क्रिकेट ग्राउंड के नाम पे, काशी द्वार के नाम पे, वरुणा कॉरिडोर के नाम पे तमाम जगहों पे ज्यादातर बहुजन समाज के लोगों को ही उजाला जा रहा है। तो हम आज ये तय करें, अहद लें कि बहुजन समाज, बहुजन समाज के लोग एक साथ मिलके अपने मुद्दों पे, अपनी समस्याओं पे एक साथ संघर्ष, संघर्ष करें। चाहे वो कारीगर हो, चाहे वो किसान हो, चाहे वो आदिवासी हो, चाहे वो छोटी पूंजी का दुकानदार हो, हम सबको मिलके एक साथ इस साजिशों के खिलाफ संघर्ष करना होगा। वरना कहीं किसानों पे हमला हो रहा है, तो कहीं बुनकरों पे हमला हो रहा है, कहीं छोटी पूंजी के दुकानदारों पे हमला हो रहा है। हम अपनेप हिस्सों की बात करेंगे तो ऐसे ही हमला झेलते जाएंगे। सत्ता इतनी शातिर है कि एक साथ हमला नहीं करती। की किस्तों में हमला करती है ताकि हम एकजुट ना होने पाए। तो साथियों काफी लंबे समय से यह पंचायत चल रही है। काफी वक्ताओं ने अपनी बात को रखा। अच्छे तरीके से रखा, विस्तार से रखा। आपस में एकता की बात की। बहुजन समाज एक मुद्दों पर कैसे एक हो? बहुजन समाज देश की सत्ता और देश की व्यवस्था में कितना बड़ा योगदान दे यह बात यहां पर हुई है। हम चाहते हैं कि हम सब मिलके इस बात को आगे बढ़ाएं और बहुजन स्वराज पंचायत जो है यह बहुजनों की पंचायत है। हम चाहते हैं कि ये पंचायतें हर गांव में हो, शहरों के मोहल्ले में हो, तमाम जगहों पे हो ताकि बहुजन समाज में एकता आए, बहुजन समाज में समझ आए, बहुजन समाज में जागरूकता आए ताकि एक जगह इकट्ठा होके बहुजन समाज के लोग इस देश में शासन अपना बनाएं और सत्ता अपनी बनाएं।

रामदुलार:

साथियों यहां पर तीन मुद्दों पर बैठक हुई थी क्योंकि यहां बहुत बड़ा सम्मेलन नहीं था इसलिए हम अपेक्षा ना करें कि हजारों की भीड़ यहां पर आएगी। जो हम लोग एक बैठक आयोजित किए थे तो जो बैठक आयोजित किए हैं उसके हिसाब से लोग पर्याप्त हैं। आप उसके हिसाब से अपनी बात को कहिए और व्यवहारिक तरीके से बातों को करिए। यहां पर तीन बातें प्रमुख रूप से मुद्दे रखे गए थे। एक तो यह है वैदिक सिटी। दूसरा था 337 करोड़ जो मुआवजा अभी तक नहीं मिला है किसानों का और तीसरा था बहुजन स्वराज कैसे स्थापित हो। ये तीन प्रमुख मुद्दे थे। इन मुद्दों को लेकर के आप लोगों ने विचार दिया और इसमें कई विचार भी आए। सभी लोगों ने दिया। साथियों मैं एक आपको बता दूं कि वास्तव में इस दुनिया का दुनिया की पूरी नींव में अगर देखा जाए तो यह बहुजन समाज ही है। बहुजन समाज यानी किसान, शिल्पकार, मजदूर, कुम्हार, बई ये जो भी जातियां हैं, जो भी कैटेगरी में बांट बांट दी गई है, यह वर्ग था, समूह था जो इस पेशे को करते थे। आज जो है इनके पेशे को बदनाम कर दिया गया है। इनको एक लिमिट में कर दिया गया है और इनको अछूत के दायरे में डाल दिया गया है। साथियों वर्ण व्यवस्था आप देख रहे हैं। इस समय जो लड़ाई हो रही है ये बहुजन सिर्फ नहीं है। ये वो वर्ग भी है जो आपके साथ जुड़कर के लड़ाई लड़ रहा है। जो प्रगतिशील विचारधारा के लोग हैं। सामान्य जातियों से जो आते हैं वो भी हैं। उनके साथ भी वो आपके साथ भी लड़ाई लड़ रहे हैं। आपकी लड़ाई को वास्तव में लड़ाई वो हमारी है। हमारी लड़ाई इस समय वास्तव में जो राष्ट्रीय स्तर पर अगर आप देखें तो एक मनोविधान और भारतीय संविधान इसी दो पर चल रहा है। हम इसी दो के बीच में लड़ रहे हैं और हम इसी के दायरे में जो है हमारा शोषण हो रहा है। आज जो हमारा जमीन जा रहा है। वैदिक सिटी के नाम पर काशी योजना के नाम पर अन्य कई योजनाओं के नाम पर जैसा कुछ लोगों ने बताया कि एक जो भारत अरे बनारस की आत्मा जो एक जगह था जो पूरे पूर्वांचल में वहां से माल जाता था। होलसेल जाता था। उसे तोड़ करके विखंडित करके वहां चौड़ा सड़क निकाला जा रहा है। कुछ कारणों से बताया जा रहा है कि जो वहां काशी विश्वनाथ मंदिर में जाने के लिए एक रास्ता चौड़ा रास्ता मिल जाएगा। है ना? यह यह बताया जा रहा है। लेकिन, इस बाजार को यह जो बनारस की जो आत्मा थी, उसको ध्वस्त कर दिया गया। कुछ साल पहले इसी इसी सरकार की एक पार्ट वन सरकार आई थी। उसने यहां पर जो आपने देखा होगा कि गांव-गांव में जो करघा चलता था, हस्तरघा चलता था। दलित जातियों के लोग पिछड़ी जातियों के लोग अपने घरों में हस्तकरघा जो है कि डाल करके बहुत बढ़िया कमाई कर रहे थे। पक्के मकान भी खड़े कर लिए थे। लेकिन, अचानक से वह सरकार आई और पूरा चौपट कर दिया हस्तक को। सिमट गया। पूरे दुनिया में जो है बनारसी साड़ी फेमस है। पूरी दुनिया में और उस पर जो है इन्होंने एकदम ग्रहण लगा दिया। जो रोजी रोटी से जुड़े हुए लोग थे, उनके पेट पर लात मार दिया। अब यही सरकार देखिए फिर से ये क्या कर रही है आपकी? यह आपके जमीनों को बनारस में आप देख लीजिए 90% जो जमीन गई है वो बहुजन समाज के ही लोगों की जमीन पर कब्जा इन्होंने किया है। तमाम तरह के वैदिक सिटी के नाम पर, काशी योजना के नाम पर या फिर स्टेडियम के स्टेडियम के नाम पे या अन्य कोई योजना देखिए और ये अभी सारनाथ की जो जमीन पांच गांव को लेकर के इन्होंने योजना का बात की बात की है। इसमें जो है इसमें हमने आपत्ति 90% लोगों ने आपत्ति दे दिया है। ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि हमने आपत्ति नहीं दिया है। जितने नोटिस मिला है, 90% यहां आपत्ति हम लोगों ने डलवाया है। पन्नालाल यादव जी हैं, हम हैं। 90% आपत्ति पड़ चुकी है। अब रह गई बात यह है कि यह यहां पर आते हैं। जैसा कि हमारे साथी किस किसी साथी ने कहा कि ये जो किसानों के राय पर ही यह जमीन दी जाएगी। किसी साथी ने कहा कि मुआवजा मूल्य नहीं है। हमारी संपत्ति हमारी जमीन बचनी चाहिए। साथियों यह जमीन उपजाऊ है और यह मल्टीपर्पज मतलब तीनों फसल का है। तीनों तरह के फसल यहां पर पैदा हर साल फसल पैदा होते हैं। यहां इसी से कितने लोगों की रोजी रोटी चलती है। अगर ये जमीन गई तो कितने लोगों के पेट पर लात मार दिया जाएगा। और ये कहां जाएंगे, कहां जमीन खरीदेंगे, पता नहीं है। और ये जो जमीन का मूल्य दिया जा रहा है, आवास विकास परिषद ले रहा है। जो सर्किल रेट है उसका दुगना देगा। इससे ज्यादा रेट आपको मिलना नहीं है। और आज एक चीज जान लीजिए आपके जो लीडरशिप है बहुजन समाज के नाम पे उसमें दलित भी मान लीजिए ये जो नेतृत्व है ये ऊपर बारगेनिंग कर रहा है। ये ऊपर चाहे पिछड़ों के नाम पर पार्टियां हैं चाहे दलितों के नाम पर पार्टियां हैं। ऊपर देखिए आप जो संविधान को खत्म करने वाले हैं उनके साथ इनका किस तरीके से रिश्ता है। इस पर आप मूल्यांकन करिए। घर बैठकर के मूल्यांकन करिए। थोड़ा सोचिए कि फला इस मुद्दे पर कौन पार्टियां बोल रही हैं? इस मुद्दे पर कौन पार्टी हमारे लिए खड़ी हो रही है। इस मुद्दे पर कौन हमारे साथ खड़ा है? इस पर जरा विचार करिए। आप विचार कर सकते हैं। इसमें पढ़े लिखे होने की जरूरत नहीं है। सामान्य लोग भी इस पर विचार कर सकते हैं। तो ये सारी रणनीतियां हैं और इनको लेकर के हम लोग आगे चल सकते हैं। साथियों ये संख्या बहुत है। मुझे लगता है पहले से भी ज्यादा हो गई है और ये अगली बार अगली बार मैं मानव जी से बात कर रहा था। कि इस बार जो कार्यक्रम हो। सभी संगठनों जो छोटे-छोटे संगठनों का नाम आप लोगों ने बताया। सारी संगठनों को लेकर के सिंहपुर में भी एक कार्यक्रम हो। हम लोग महिलाओं पुरुषों को लेकर के इकट्ठा करेंगे। लोगों से मिलेंगे और वहां भी कार्यक्रम करेंगे और बहुजन समाज के अस्तित्व को लेकर के उस पर हम लोग चर्चा करेंगे। इसमें किसान न्याय मोर्चा भी होगा। किसानों की समस्याएं जो वैदिक सिटी है और जो 337 करोड़ का भी मामला है। ये कैसे जो है कि इसको लिया जाए और कैसे इस पर रणनीति हो इस पर भी विचार विमर्श किया जाएगा। तो यहां पर आए हुए सभी साथियों का मैं बहुत-बहुत धन्यवाद ज्ञापन करता हूं और और इसी के साथ मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं और सभा का भी समापन की घोषणा करता हूं। जय हो।


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