LJA Events 2026
सलारपुर-दीनापुर वार्ड में वार्ड ज्ञान पंचायत
रविवार 20 सितम्बर 2026
आज 20 सितंबर, रविवार को जगदेव प्रतिमा स्थल सलारपुर में वार्ड ज्ञान पंचायत सलारपुर-दीनापुर की एक पंचायत हुई। इस पंचायत की अध्यक्षता नंदू पालने किया। शुरू में लक्ष्मण प्रसाद ने पंचायत के विषय को प्रस्तुत किया- पहला यह कि अपने वार्ड पंचायत के अंतर्गत आने वाले समस्याओं का निवारण और दूसरा बहुजन स्वराज पंचायत का विचार। बहुजन समाज के पास न सिर्फ उत्पादन और सृजन का ज्ञान है बल्कि अपनी समस्याओं का हल करना,समाज, देश और दुनिया को खुशहाल बनाने का भी ज्ञान है। उनकी सक्रिय भागीदारी तथा ज्ञान और अनुभव से ही बहुजन की व्यवस्थाएं बन सकती हैं ।
सलारपुर निवासी जयप्रकाश ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए कोई एक ऐसा संगठन नहीं है जिसके द्वारा अपने क्षेत्र की समस्याओं को दूर किया जा सके। वार्ड ज्ञान पंचायत को पुनः संगठित एवं नियमित करना होगा। हमलोगों को अपना तन मन धन लगाकर इस कार्य को मूर्त रूप देना होगा। बिजली, प्रकाश, रास्ता, पेयजल इत्यादि जर्जर हालत में है। रामधनी जी ने इनकी बातों का समर्थन करते हुए कहा कि महीने में एक दिन सबको समय देना होगा जिससे कि इन तमाम समस्याओं से छुटकारा पाया जा सके। सदानंद जी और सुरेंद्र कुमार जी ने भी इन बातों का समर्थन किया और कहा कि वार्ड ज्ञान पंचायत की बैठक नियमित की जानी चाहिए।
राजेंद्र प्रसाद मानव ने बहुजन स्वराज पंचायत के विचारों को अपने पूर्व में किए गए संघर्षो के मार्फत रखा उन्होंने कहा कि लोगों की एकजुटता और कठिन संघर्ष के बाद हम लोगों ने अपने सिंहपुर गांव में दबंगों से गांव की जमीन को मुक्त कराया । युवा कमेटी के सहयोग से गांव में विद्यालय खोला गया और उसे तब तक चलाया गया जब तक कि उस जमीन पर सरकारी विद्यालय नहीं बन गया। रिंग रोड में किसानों की लड़ाई इसीलिए संभव हो पाई क्योंकि वहां पर सरकार के अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले सभी लोग एकजुट हुए, आपस में बात विचार हुआ, संघर्ष करने की योजना बनी और संयोग से बहुत से बाहर के लोगों ने भी आंदोलन में ताकत भरी। रिंग रोड का आंदोलन एक सफल आंदोलन बना। इसमें सबसे बड़ी संख्या मातृशक्ति अर्थात महिलाओं की भागीदारी रही। बहुजन स्वराज की यह खासियत है कि इसमें सामान्य जन के लोग आपसी एकता के द्वारा कठिन से कठिन काम को संपन्न कर पाने में सफल हो जाते हैं।
शिव मूरत मास्टर साहब ने इसी बात को आगे बढ़ते हुए अपने आसपास हुए आंदोलनों का स्मरण करते हुए कहा कि लोगों की एकजुटता, लोगों के ज्ञान के बल पर लगभग 30 साल पहले सिवेज ट्रीटमेंट प्लांट के खिलाफ किसानों का आंदोलन हुआ था। सुनील सहस्रबुद्धे जी का मार्गदर्शन रहा। उस आंदोलन में बड़ी संख्या में जन भागीदारी थी। हम लोग गांव-गांव बैठक करते, लोगों को जोड़ते, लोगों से विचार-विमर्श करते और एक बहुत बड़ा जन आंदोलन खड़ा हो गया। वह आंदोलन एक मुकाम हासिल किया। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के आसपास कई ऐसे फैक्ट्री खुल गए थे जो कचरा पीसकर खाद बनाते थे और बस्तियों में उसका भयंकर प्रदूषण फैलता था। लगभग 15 वर्ष पूर्व उसके खिलाफ भी आंदोलन छेड़ा गया और एक फैक्ट्री को छोड़कर बाकी सभी फैक्ट्रियां बंद हो गयी। जन के ताकत का यह परिणाम था। यह सभी आंदोलन बहुजन स्वराज के बुनियाद रहे। बहुजन स्वराज में सामान्य जन की शक्ति होती है। इस शक्ति को बहुजन विचार से संगठित करके बहुजन स्वराज की दिशा में बड़ा जा सकता है।
महेंद्र प्रताप मौर्य जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बहुजन स्वराज बुद्ध की विचारधारा के अनुरूप है। बुद्ध समाज में न्याय और समानता लाना चाहते थे। बहुजन स्वराज का भी वही विचार और कार्य है। बहुजन स्वराज उन सभी के लिए है जो लोग समाज में अत्याचार, अन्याय के खिलाफ लड़ना और भाईचारा स्थापित करना चाहते हैं।
गीता जी ने पारंपरिक मूल्यों व मान्यताओं की बात करते हुए कहा कि आधुनिक विकास ने समाज को तोड़ा है। हमें अपने भाईचारा पर आधारित पुराने मूल्यों और विचारों को अपनाना चाहिए। सबके साथ प्रेम का व्यवहार रखना चाहिए।
पंचायत में विद्यानाथ, कुंवर जी, भाई राम, बसंत लाल, बचाऊलाल, राजकुमार, विजय कुमार, सुरेंद्र कुमार, सदानंद आदि लोग शामिल थे। अध्यक्षता कर रहे नंदू पाल ने एक किसान गीत गाकर लोगों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।
विशेष:
पंचायत के सक्रिय साथी रामसूरत जी का आकस्मिक निधन विगत माह 15 अगस्त को 75 वर्ष की आयु में हो गया। आपके निधन पर शोक व्यक्त किया गया एवं 2 मिनट का मौन रखा गया। सलारपुर निवासी रामसूरत जी घर पर बनारसी साड़ी बुनते थे। वर्तमान में उनके पुत्र पावर लूम पर साड़ी बुनते हैं। रामसूरत जी अंबेडकरवादी थे और बहुजन आंदोलन और बहुजन समाज पार्टी से जुड़े हुए थे।भारतीय किसान यूनियन के कार्यक्रमों, पंचायतों और आंदोलनों में भी उनकी भागीदारी हुआ करती थी। विद्या आश्रम से भी उनका गहरा जुड़ाव था। विगत माह 1 अगस्त 2026 को विद्या आश्रम स्थापना दिवस में शामिल हुए थे और भोजन व्यवस्था में सक्रिय योगदान दिए थे। उनका स्वभाव बहुत ही सहज एवं सरल था।






